स्टोरी : कुमार अतुल
अक्सर हम सुनते हैं कि किसी पेय पदार्थ की बोतल में मक्खी मिली। कई बार दूसरे कीड़ों या छिपकली भी मिलने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में हम क्या करते हैं। जहां से सामान खरीदते हैं उससे बहस होती है। कई बार यह विवाद बड़ी लड़ाई की वजह भी बन जाता है। एक वक्त ऐसा भी था जब खाद्य या पेय पदार्थों में कीड़ा-मकोड़ा पड़ जाने पर लोगों को सब्र करना पड़ता था। किसी तरह की कानूनी मदद नहीं मिल पाती थी। लेकिन डोनोघ के मामले ने पूरी तस्वीर बदल दी।
अक्सर हम सुनते हैं कि किसी पेय पदार्थ की बोतल में मक्खी मिली। कई बार दूसरे कीड़ों या छिपकली भी मिलने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में हम क्या करते हैं। जहां से सामान खरीदते हैं उससे बहस होती है। कई बार यह विवाद बड़ी लड़ाई की वजह भी बन जाता है। एक वक्त ऐसा भी था जब खाद्य या पेय पदार्थों में कीड़ा-मकोड़ा पड़ जाने पर लोगों को सब्र करना पड़ता था। किसी तरह की कानूनी मदद नहीं मिल पाती थी। लेकिन डोनोघ के मामले ने पूरी तस्वीर बदल दी।
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